कांकेर. सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ सब्जी की खेती में एक युवाअपनी किस्मत गढऩे में जुटा है। पांच साल की मेहनत रंग लाने लगी है। शिक्षा के साथ नियमित खेतों से टमाटर, बैगन, बरबट्टी के उत्पादन से परिवार की आर्थिक सेहत भी बदलने लगी है। बेटे की इस पहल से माता-पिता का हौसला भी बढ़ा दिया है।
शहर से मात्र 10 किमी दूर ग्राम पंचायत पुसवाड़ा निवासी पप्पू पटेल पिता धनश्याम पटेल सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त कर रहा है। गांव से नियमित क्लास करने के लिए शहर आता है। इंजीनियर बनने का सपना लिए युवा पांच साल से अपने दो एकड़ खेतों में तकनीकी विधि से सब्जी खेती कर रहा है। टमाटर, बैगन और बरबट्टी का उत्पादन बड़े स्तर पर कर रहा है, वह भी बिना किसी सरकारी सहयोग से।
पत्रिका टीम को पप्पू पटेल ने बताया कि उसका सिविल इंजीनियरिंग में इस साल फाइनल इयर है। पांच साल पहले गांव में सब्जी की खेती देखकर पिता के साथ तकनीकी विधि से सब्जी के पौधों को लगाना प्रारंभ किया। पहली साल तकनीकी विधि से खेती करने पर अधिक लाभ मिला। इसके बाद से वह ड्रीप विधि से पौधों तक पानी, खाद, दवा आदि का उपयोग करना शुरु कर दिया। हर साल वह लाखों रुपए की सब्जी खेती में बचत कर रहा है।
बेटे के इस हौसले को देखकर माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य भी खेती में पूरी तरह से रम चुके हैं। सब्जी की खेती में जहां अधिक मुनाफा हो रहा, वहीं- परिवार के अन्य सदस्यों को मजदूरी नहीं करनी पड़ रही है। खेत में तैयार हो रही सब्जी को व्यापारियों के हाथों बेच देता है। कम उत्पादन आने पर खुद मंडी में विक्रय कराता है। शिक्षा के साथ दो एकड़ की सब्जी में दो लाख से अधिक हर साल बचत कर युवा परिवार का हौसला बढ़ा रहा है।
सैकड़ों लोगों को सब्जी खेती में मिलता रोजगार
सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा के साथ युवा सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहा है। टमाटर, बरबट्टी और बैगन में दवा, निदाई-गुड़ाई के कार्य में गांव के मजदूरों को रोजगार भी दे रहा है। इस साल टमाटर के पौधों को पालीथिन का रोल लगाकर रोपण कर रहा है। पप्पू ने बताया कि इस विधि से सब्जी की खेती में निदाई-गुडाई की आवश्यकता नहीं होती है। खेत में खरपतवार नहीं होने से पौधों को अधिक ऊर्जा मिलती है। थोड़ी सी सावधानी और तकनीकी विधि का प्रयोग करने से इसका अधिक लाभ होता है। कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलने के बाद भी खेती में युवा जुटा है।

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