Thursday, July 16, 2020

किसान दिवस विशेष: किसान मोटाराम ने पहली बार उगाई 2 लाख रुपए किलो वाली फसल


Farmers Day Special Story : राजस्थान के सीकर जिले के पास नानी गांव में किसान मोटाराम शर्मा ( Farmer Motaram ) ने कोडी सेफ मशरूम ( Mushroom Farming In Rajasthan Sikar ) को उगाने में सफलता हासिल की है। अब तक मोटाराम ने ऋषि मशरूम, पिंक मशरूम, शाजर काजू, काबुल एंजाई, ब्लैक ईयर, ओयस्टर, डीजेमोर, सिट्रो, सागर काजू सरीखी 16 किस्म की मशरूम ( 16 Varieties Of Mushrooms ) तैयार की है।

सीकर.
Farmers Day Special Story : राजस्थान के सीकर जिले के पास नानी गांव में किसान मोटाराम शर्मा ( Farmer Motaram ) ने कोडी सेफ मशरूम ( Mushroom Farming In Rajasthan Sikar ) को उगाने में सफलता हासिल की है। अब तक मोटाराम ने ऋषि मशरूम, पिंक मशरूम, शाजर काजू, काबुल एंजाई, ब्लैक ईयर, ओयस्टर, डीजेमोर, सिट्रो, सागर काजू सरीखी 16 किस्म की मशरूम ( 16 Varieties Of Mushrooms ) तैयार की है। दावा है कि प्रदेश में पहली बार तैयार कोडी सेफ मशरूम के भाव दो लाख रुपए किलो तक है। गौरतलब है कि मोटाराम को मशरूम उत्पादन के लिए भारत सरकार ने कृषि सम्राट और कृषि रत्न पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

कोडी सेफ मशरूम हिमाचल में उगने वाली एक बेहद दुर्लभ प्रजाति की मशरूम की है। इस मशरूम की तिब्बत, चाइना, मलेशिया, कोरिया जैसे विदेशों में भारी मांंग है। कैंसर, एचआइवी, हिपेटाइटस, मधुमेह के इलाज में कारगर यह मशरूम हिमाचल में बर्फ पिघलने के बाद एक कीडे के मरने के बाद उसके सिर में पैदा होने वाली फफूंद होती है। कीड़े के आकार के आधार पर इसे स्थानीय भाषा में कीडाजड़ी के नाम से जाना जाता है। सोलन में इसका प्रशिक्षण लेने के बाद वे वहां से एक परखनली में कल्चर लेकर आए। सीकर में इसका उत्पादन लेने की ठानी और ऑटोक्लेव पद्धति से ब्राउन राइस का बेस तैयार किया।


अब देते हैं प्रशिक्षण
मशरूम उत्पादन में समृद्धि की राह पर चलने वाले मोटाराम शर्मा की गिनती देश के प्रगतिशील मशरूम उत्पादकों में होती है। हिमाचल के सोलन में राष्ट्रीय खुंब निदेशालय से प्रशिक्षण लेने के बाद मशरूम उत्पादन को बढ़ाने के लिए मोटाराम शर्मा अब युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं।

यह सच है कि मशरूम उत्पादन के जरिए किसान खुद की आमदनी बढ़ा सकता है। मोटाराम की ओर नई किस्म तैयार की गई जिससे निस्संदेह किसानों को फायदा होगा। -एसआर कटारिया, उपनिदेशक, कृषि सीकर

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English translation:-

Farmer's Day Special: Farmer Motaram cultivates 2 lakh rupees kg crop for the first time

Farmers Day Special Story: Farmer Motaram has succeeded in growing Kodi Safe Mushroom (Mushroom Farming In Rajasthan Sikar) in Nani village near Sikar district of Rajasthan.  So far Motaram has produced 16 varieties of mushrooms (16 Varieties of Mushrooms) like Sage Mushroom, Pink Mushroom, Shajar Cashew, Kabul Enzai, Black Year, Oyster, Djemore, Citro, Sagar Cashew.

Sikar.

 Farmers Day Special Story: Farmer Motaram has succeeded in growing Kodi Safe Mushroom (Mushroom Farming In Rajasthan Sikar) in Nani village near Sikar district of Rajasthan.  So far Motaram has produced 16 varieties of mushrooms (16 Varieties of Mushrooms) like Sage Mushroom, Pink Mushroom, Shajar Cashew, Kabul Enzai, Black Year, Oyster, Djemore, Citro, Sagar Cashew.  It is claimed that the price of Kodi Safe Mushroom prepared for the first time in the state is up to two lakh rupees per kg.  Significantly, Motaram has been awarded the Krishi Samrat and Krishi Ratna Awards by the Government of India for mushroom production.


 Kodi Safe Mushroom is an extremely rare mushroom species grown in Himachal.  This mushroom is in great demand abroad like Tibet, China, Malaysia, Korea.  Effective in the treatment of cancer, HIV, hepatitis, diabetes, this mushroom is a fungal in the head of Himachal after a worm dies after melting ice.  Depending on the size of the worm, it is known as Kidazadi in the local language.  To take training in Solan…

Now gives training

 Motaram Sharma, who is on the path of prosperity in mushroom production, is counted among the progressive mushroom growers of the country.  Motaram Sharma now trains youths to increase mushroom production after training from the National Khub Directorate in Solan, Himachal.


 It is true that farmers can increase their own income through mushroom production.  A new variety was prepared towards Motaram which will undoubtedly benefit the farmers.  - SR Kataria, Deputy Director, Agriculture Sikar




सब्जी की खेती ने बदली इस इंजीनियरिंग स्टूडेंट की किस्मत, कमा रहा लाखों


सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ सब्जी की खेती में एक युवाअपनी किस्मत गढऩे में जुटा है। पांच साल की मेहनत रंग लाने लगी है।

कांकेर. सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ सब्जी की खेती में एक युवाअपनी किस्मत गढऩे में जुटा है। पांच साल की मेहनत रंग लाने लगी है। शिक्षा के साथ नियमित खेतों से टमाटर, बैगन, बरबट्टी के उत्पादन से परिवार की आर्थिक सेहत भी बदलने लगी है। बेटे की इस पहल से माता-पिता का हौसला भी बढ़ा दिया है।

शहर से मात्र 10 किमी दूर ग्राम पंचायत पुसवाड़ा निवासी पप्पू पटेल पिता धनश्याम पटेल सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त कर रहा है। गांव से नियमित क्लास करने के लिए शहर आता है। इंजीनियर बनने का सपना लिए युवा पांच साल से अपने दो एकड़ खेतों में तकनीकी विधि से सब्जी खेती कर रहा है। टमाटर, बैगन और बरबट्टी का उत्पादन बड़े स्तर पर कर रहा है, वह भी बिना किसी सरकारी सहयोग से।

पत्रिका टीम को पप्पू पटेल ने बताया कि उसका सिविल इंजीनियरिंग में इस साल फाइनल इयर है। पांच साल पहले गांव में सब्जी की खेती देखकर पिता के साथ तकनीकी विधि से सब्जी के पौधों को लगाना प्रारंभ किया। पहली साल तकनीकी विधि से खेती करने पर अधिक लाभ मिला। इसके बाद से वह ड्रीप विधि से पौधों तक पानी, खाद, दवा आदि का उपयोग करना शुरु कर दिया। हर साल वह लाखों रुपए की सब्जी खेती में बचत कर रहा है।

बेटे के इस हौसले को देखकर माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य भी खेती में पूरी तरह से रम चुके हैं। सब्जी की खेती में जहां अधिक मुनाफा हो रहा, वहीं- परिवार के अन्य सदस्यों को मजदूरी नहीं करनी पड़ रही है। खेत में तैयार हो रही सब्जी को व्यापारियों के हाथों बेच देता है। कम उत्पादन आने पर खुद मंडी में विक्रय कराता है। शिक्षा के साथ दो एकड़ की सब्जी में दो लाख से अधिक हर साल बचत कर युवा परिवार का हौसला बढ़ा रहा है।

सैकड़ों लोगों को सब्जी खेती में मिलता रोजगार
सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा के साथ युवा सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहा है। टमाटर, बरबट्टी और बैगन में दवा, निदाई-गुड़ाई के कार्य में गांव के मजदूरों को रोजगार भी दे रहा है। इस साल टमाटर के पौधों को पालीथिन का रोल लगाकर रोपण कर रहा है। पप्पू ने बताया कि इस विधि से सब्जी की खेती में निदाई-गुडाई की आवश्यकता नहीं होती है। खेत में खरपतवार नहीं होने से पौधों को अधिक ऊर्जा मिलती है। थोड़ी सी सावधानी और तकनीकी विधि का प्रयोग करने से इसका अधिक लाभ होता है। कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलने के बाद भी खेती में युवा जुटा है।

अरे वाह। इस खेती से लाखों की कमाई कर रहा है ये किसान


आप भी कर सकते हैं ऐसा, जानिए कैसे ?

शहडोल- अगर कोई भी चीज सही तरीके से, सही सलाह के साथ, और सही जानकारी के साथ की जाए तो फिर उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ ऐसी ही कहानी है किसान लाल बाबू की, जिन्होंने अपनी खेती करने के स्टाइल को बदला, धान-गेहूं की जगह पर सब्जी की खेती करनी शुरू की, और फिर क्या, अब तो सफलता उनके कदम चूम रही है। जो किसान अपनी खेती से कभी संतुष्ट नहीं रहता था। हमेशा निराश रहता था। क्योंकि खेती उसके लिए फायदे का सौदा नहीं बन पा रही थी। अब वही किसान लाखों कमा रहा है। और उसका जीवन अब खुशहाल है।

ऐसे किसान बना लखपति
जिले के सोहागपुर विकास खण्ड ग्राम भमरहा के कृषक लालबाबू सिंह सेंगर ने बताया कि उद्यानिकी फसलों की खेती से उसे दुगना लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि जिससे उसका लगाव सब्जी की खेती करने में बढ़ा है। किसान के मुताबिक वो पहले पारंपरिक खेती किया करते थे। धान, चना और गेंहू की फसल लेता था। उद्यानिक विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने और उनके द्वारा उद्यानिकी फसलों की खेती के लिये प्रेरित करने पर उन्होंने साल 2014-15 में उद्यानिकी विभाग से सहयोग लेकर बरबटी, गिलकी और गोभी की खेती प्रारंभ की। उन्होंने बताया कि इससे फायदा होने पर उन्होंने उद्यान विभाग से ड्रिप सिंचाई पद्धति, मल्ंिटंग वर्मी कम्पोस्ट इकाई, पॉली हाउस आदि के लिये सहायता ली तथा उन्नत खेती के प्रयास प्रारंभ किए हंै।

आज लालबाबू गोभी, बरबटी, गिलकी, टमाटर आदि की खेती पूरे आधुनिक तरीके से कर रहे हैं, और अच्छी आय हासिल कर रहे हैं। लालबाबू के मुताबिक पहले जब वो पारंपरिक खेती किया करते थे तो उन्हें लाभ नहीं होता था। वो निराश रहा करते थे। लेकिन अब वो उद्यानिकी खेती करके दोगुना लाभ कमा रहे हैं। इतना ही नहीं लाल बाबू ङ्क्षसह सेंगर ने अन्य किसानों से भी कहा है कि वो भी उद्यानिकी फसलें
लेकर अच्छी आय हासिल कर सकते हैं।

इसे कहते हैं मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती: 75 दिन में एक एकड़ में आलू की खेती से कमा रहे सवा लाख रुपये का मुनाफा


 
किसान मृत्युंजय सिंह सोलंकी ने दो साल से खेती में अमूलचूक परिवर्तन लाते हुए बंपर उत्पादन से न सिर्फ किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं बल्कि जिले में उन्नत कृषक अवार्ड अपने नाम किया है। इसके अलावा परिवार को समृद्ध किया है। उत्पादन ऐसा कि कृषि जगत से जुड़े अधिकारी और बड़े-बड़े किसान भी हैरान हैं।


बालमीक पांडेय @ कटनी. मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती...। देश की कृषि के लिए समर्मित यह पंक्ति इन दिनों चरितार्थ हो रही है कटनी जिले के रीठी तहसील क्षेत्र अंतर्गत छोटे से गांव सुगवां में। जहां के किसान मृत्युंजय सिंह सोलंकी ने दो साल से खेती में अमूलचूक परिवर्तन लाते हुए बंपर उत्पादन से न सिर्फ किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं बल्कि जिले में उन्नत कृषक अवार्ड अपने नाम किया है। इसके अलावा परिवार को समृद्ध किया है। उत्पादन ऐसा कि कृषि जगत से जुड़े अधिकारी और बड़े-बड़े किसान भी हैरान हैं। जिस परंपरागत खेती में नित-नए प्रयोग कर किसान महज प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये धान और गेहूं की खेती में कमा रहे हैं वहां पर किसान आलू की खेती कर लागत काटते हुए सवा लाख रुपये का सीधा मुनाफा मात्र 75 दिन में कमा रहे हैं। जानकारी के अनुसार किसान मृंत्युजय सिंह सोलंकी 20 एकड़ में जी-1 आलू की खेती कान्ट्रेक्ट फॉर्मिंग के तहत की है। इसमें किसान को सिर्फ खेती करना पड़ रही है। तकनीकी सलाह, तरीका कंपनी के लोग बता रहे हैं और फसल तैयार होने पर सीधे खेत से ही आलू क्रय कर रहे हैं। किसान ने बताया कि एक एकड़ में आलू की खेती में 45 से 50 हजार रुपये की लागत आई है। किसान ने आलू की खेती सी-ड्रिल पद्धति से की है, जिसमें पानी की बचत भी होती है।

 

'नंदनवन' से किसान की जिंदगी में 'आनंद', 75 आंवलों के पौधों से 85 हजार का मुनाफा, धान और गेहूं की उन्नत खेती कर बने मिसाल

 

ऐसे हो रही बंपर पैदावार
किसान ने बताया कि एक एकड़ में 120 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। 20 एकड़ में किसान को 2400 क्विंटल आलू की पैदावार हो रही है। 2 लाख 40 हजार किलोग्राम आलू का उत्पादन हो रहा है। इसमें से किसान से कंपनी द्वारा सीधे 10 रुपये 50 पैसे प्रतिकिलोग्राम के मान से क्रय कर रही है। इसमें किसान को कुल आमदनी 20 एकड़ में 25 लाख 20 हजार रुपये हो रही है। इसमें प्रति एकड़ किसान को लागत 50 हजार रुपये आई और सीधे तौर पर मुनाफा एक लाख 26 हजार प्रति एकड़ हो रही है। बता दें कि किसान ने 2018-19 में 10 एकड़ में आलू की खेती की थी। मुनाफा बेहतर मिलने पर इस साल 20 एकड़ में की है। इस साल और अधिक फसल अच्छी आने पर अगले वर्ष 40 एकड़ में आलू लगाने की योजना बनाई है।


मात्र 75 दिन की है फसल
किसान ने बताया कि आलू की खेती का सबसे बड़ा फायदा है कि यह बहुत ही कम दिनों में तैयार हो रही है। गेहूं, धान आदि की फसल 4 से 5 माह में होती है, लेकिन आलू मात्र 75 दिन में तैयार हो गया है। किसान ने कहा कि गेहंू और धान में की परंपरागत खेती में उन्हें मात्र 12 से 14 हजार रुपये प्रति एकड़ ही आमदनी हो रही थी, आलू और मक्का से बढ़े उत्पादन ने खेती में और ललक बढ़ा दी है।


मक्का की खेती में मिला अवार्ड
धान के साथ में किसान ने मक्का की खेती की। साढ़े तीन एकड़ में पाइनर स्वीटकॉर्न लगाया। किसान ने बताया कि इस फसल को लगाने में एक एकड़ में 10 हजार रुपये की लागत आई। इसमें दो लाख रुपये की मक्का बेंचा। साढ़े तीन माह में बगैर पानी, कम मेहनत के दो लाख रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ। इसके लिए किसान को उन्नत कृषक अवार्ड से गणतंत्र दिवस में सम्मानित किया गया। कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने गणतंत्र दिवस पर मृत्युंजय सिंह सोलंकी व पत्नी आशा सोलंकी को सम्मानित किया।

 

जल संसाधन विभाग ने सिंचाई के लिए घटाया रबी सीजन का रकबा, जांच के लिए जबलपुर से पहुंचे इइ

 

 

खास-खास:
- किसान ने खरीफ में मक्का की खेती में अच्छा मुनाफा मिलने के बाद इसे रबी सीजन में अपनाया है। किसान ने चार एकड़ में स्वीटकॉन की फसल की बोवनी की है। मार्च-अप्रैल में उत्पादन शुरू हो जाएगा।
-किसान मृत्युंजय सिंह सोलंकी 100 एकड़ में कर रहे हैं खेती, पत्नी आशा सोलंकी व पुत्र रवींद्र सोलंकी कर रहे खेती में मदद, 50 वर्ष से से कर रहे खेती, परंपरांगत खेती से किया किनारा, विशेष फायदा नहीं मिलने पर बदला तरीका।
- कान्ट्रेक्ट फॉर्मिंग की ओर बढ़ाया हाथ, उद्यानिकी विभाग विभाग व कंपनी की मदद से आलू, मक्का की खेती से कमा रहे अच्छा खासा मुनाफा। कंपनी वालों ने जब इस खेती के बारे में बताया तो रीवा के किसान से क्रॉस वेरीफिकेशन करने के बाद किसान ने की खेती, जोखिम उठाया और अब मुनाफा कमा रहे हैं।


इस सोच ने बना दिया किसान
किसान ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि बचपन से ही खेती में लगाव था। पहले नौकरी का ख्याल आया, लेकिन फिर सोचा कि ऐसा काम किया जाए जिससे जीवन में स्वतंत्रता रहे। किसी का दबाव न हो और खेती शुरू की। खास बात यह है कि हर खेती के लिए उपकरण रखते हैं ताकि बेहतर तरीके से खेती की जा सके और आमदनी बेहतर हो। बता दें कि किसान क्षेत्र और जिले के किसानों को भी उन्नत खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 2019 में कॉन्ट्रेक्ट पोटेटो फॉर्मिंग सिर्फ 25 एकड़ में खेती हुई थी। किसान ने जिले के अन्य किसानों को और पे्ररित किया और इस साल 170 एकड़ में खेती हुई है। किसान ने बताया कि कृषि कार्य में पत्नी आशा सोलंकी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। पूरा समय वे भी खेती में देती हैं। एमए, एलएलएलबी करने के बाद नौकरी न करके कृषि क्षेत्र में बेहतर आयाम स्थापित कर रही हैं।



खेती से परिवार हुआ समृद्ध
किसान मृत्युंजय सिंह सोलंकी ने बताया कि 25 साल पहले पैतृक 30 एकड़ जमीन खेती में मिली थी। मुनाफा कमाकर अब 100 एकड़ जमीन तैयार कर ली है। खेती से ही बच्चों को शिक्षित किया है। बड़े बेटे को डॉक्टर बनाया है। डॉ. फणींद्र सिंह सोलंकी जो कि यूरोलॉजी में सुपर स्पेशलिस्ट (एचओडी) मेडिकल कॉलेज जबलपुर में हैं। छोटे पुत्र रवींद्र सिंह सोलंकी को ग्रेज्युट कराया जो पापा के साथ खेती में हाथ बंटा रहे हैं।